500 रुपये और एक मुर्गे की कीमत पर बिकता विकास – मेरे गांव जैतपुर की एक सच्चाई
मेरा नाम सौरव वैष्णव है, और आज मैं अपने गृह ग्राम जैतपुर के बारे में कुछ कहना चाहता हूँ। यह कोई कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसी सच्चाई है जो शायद देश के हजारों गांवों की हकीकत भी है। मेरा गांव जैतपुर एक छोटा सा, शांत और खुशहाल गांव है। यहां लगभग 1800 से अधिक लोगों की आबादी है और 9 वार्ड हैं। गांव के लोग मेहनती हैं, खेती-बाड़ी करते हैं, त्योहार मिलजुल कर मनाते हैं और एक दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं। बाहर से देखने पर यह गांव बहुत अच्छा लगता है, लेकिन अंदर एक ऐसी समस्या है जो पिछले लगभग 2 साल से लोगों की जिंदगी को परेशान कर रही है। गांव के वार्ड नंबर 03, 06 और 07 में एक पंचायती नल है, जो पिछले करीब दो साल से बंद पड़ा हुआ है। यह कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है, इसे ठीक करने में शायद ज्यादा समय या पैसा भी नहीं लगेगा, लेकिन दुख की बात यह है कि इतने समय के बाद भी इसे ठीक नहीं किया गया। सबसे हैरानी की बात यह है कि वार्ड नंबर 03 में हमारे गांव के उपसरपंच रहते हैं और वार्ड नंबर 06 से पिछले लगभग 10 सालों से एक ही पंच निर्विरोध चुना जाता रहा है। आप उन्हें गांव के दिग्गज नेता भी कह सकते हैं...